Archive for the ‘Hindi’ Category

From Geetanjali – Ravindranath Tagore

August 3, 2008

हे जीवन के प्राण

हे जीवन के प्राण ! मेरा अन्तर विकसित कर !

निर्मल कर, उज्ज्वल कर, सुन्दर कर, जागरित कर,

निर्भय और उद्यत कर, निरालस और शंकारहित कर !

हे जीवन के प्राण ! मेरा अन्तर विकसित कर !

मेरा अंत:करण सब से जोड़ता, मुझे बन्धन मुक्त कर !

मेरे सब कामों में तेरा शांतिमय छंद भर जाय !

अपने चरण-कमल पर मेरा चित्त स्थिर कर !

मुझे आनन्दित कर, आनन्दित कर, आनन्दित कर !

हे जीवन के प्राण ! मेरा अन्तर विकसित कर !

अनुवाद: सत्यकाम विद्यालंकार, इंदु जैन

Translation of a poem – “मिले ना मिले”

July 9, 2008

I tried to translate a very famous and popular Gujarati poem penned by Shri Adil Mansoori. Hope it will cross the language barrier and reach out to many hearts out there!!

नदी की रेत में खेलता शहर मिले ना मिले,
फिर से यह दृश्य स्मृतिपट पर मिले ना मिले ।

भर लो सांस में उस की महक का दरिया,
बाद में यह मिट्टी की भीनी असर मिले ना मिले ।

परिचितों को दिल भर कर देख लेने दो,
यह मुस्कुराते चेहरे, यह मीठी नज़र मिले ना मिले ।

भर लो आँख में रास्ते, खिड़कियाँ, दीवारें,
बाद में यह शहर, यह गलियाँ, यह घर मिले ना मिले ।

रो लो आज रिश्तों से लिपट कर यहाँ,
बाद में किसी को किसी की कब्र मिले ना मिले ।

विदा करने आये हैं वो चेहरे घूमेंगे आँखों में,
चाहे सफ़र में कोई हमसफ़र मिले ना मिले ।

वतन की धूल से माथा भर लूँ आदिल‘,
अरे, यह धूल बाद में फ़िर उम्रभर मिले ना मिले ।

Translation of a poem – विषाद

July 5, 2008

I translated a Gujarati poem વિષાદ in Hindi.

मुझे पसंद है,

मेरा विषाद…

बहुधा प्रेम करता हूँ

और

इस तरह स्वागत करता रहता हूँ

मेरे विषाद का !

बस,

फ़िर उस के प्रति आत्मसमर्पण करता हूँ…

वह भी मेरा स्वीकार करता है

(कोई तो है, जो मेरा स्वीकार करता है…

और,

किसी को तो मैं समर्पित हो सकता हूँ

पूर्णरूपेण !!)

मैं उस का मज़ा लेता हूँ,

वह मुझे गले से लगाता है

कस कर…

मेरा अस्तित्त्व हाँफ़ने लगे तब तक…

मुझे मज़ा आता है,

जब वह छिल देता है

मेरी आत्मा को,

अपने अद्रश्य नाखूनों से

(जो मुझे किसी प्रेयसी के

स्पर्श से भी ज़्यादा रेशमी लगते हैं)

और जला देता है अपनी

अगनज्वाला में

मेरी

अमरत्व प्राप्त इच्छाओं को भी !

मुझे पसंद है,

मेरा विषाद…

इसीलिए तो

फ़िर से नए प्रेम की

खोज में हूँ

आजकल !